Friday, March 6, 2026

Naari ki Swaroop

 मैं आज की नारी हूँ 

कंधे से कन्धा मिलाके चलने वाली 

हर क्षेत्र में सहभागी हूँ

 Pratapi तेजस्विनी स्वाभिमानी bhi हूँ

हाँ .....मैं आज की नारी हूँ 

 

 सृजन  se sringaar तक 

हर रूप में ढली हूँ मैं 

बेटी बनके नाज़ो से 

phoolo jaise पली हूँ मैं 

बहन बनके खिली भी मैं 

 गृहलक्ष्मी sa bhi saji

माँ का saubhagya se 

mamta ka गौरव mein dhali

घर परिवार के रिश्ते नाते निभाते huye

अपने वजूद bhula chuki

हर स्तर पर खड़ी utri 

Par ....Apne hone ka ehsaas

 kab ka chod chuki

गुमनामी के ज़िन्दगी जीते jeete

अपनी आवाज़ खो चुकी 


हाँ, संकोच रखती हूँ मैं  

Apne armaano se sharmaana

मर्यादा के नाम पे 

त्याग की मूरत banna

Mujhe manzoor na tha

Apne hak ki balidaan dena

Apne adhikaro ke hit mein

Mujhe bhi apni aawaz buland karna


पंख लगाके मुझे भी है उड़ना 

अंतहीन हैं मेरी राहें

सीमाओं के पार हैं 

निरंतर चलने वाली 

अविरामी बहने वाली धार hu mein

 

युग युग से संस्कारी है नारी 

परम्पराओं के अनुयायी 

आदि युग से नारी की महिमा 

सुन के मैं बलिहारी 


ज्ञान की देवी सरस्वती

 माँ गंगा पावन इतनी 

दिव्य शक्ति प्रतापी है नारी

असुरों के सँघारी 

वीराँगना शौर्य है जितना 

माता जगतोद्धारि 



नाज़ है मुझको नारीत्व pe

अपने अस्तित्व pehchaani

Humhe नाज़ूक न समझना 

शक्ति के स्वरुप hai hum

ईश्वर की अपरम्पार महिमा

रचनात्मक रूप hain hum





 


 


 


 


 




 

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