मैं आज की नारी हूँ
कंधे से कन्धा मिलाके चलने वाली
हर क्षेत्र में सहभागी हूँ
Pratapi तेजस्विनी स्वाभिमानी bhi हूँ
हाँ .....मैं आज की नारी हूँ
सृजन se sringaar तक
हर रूप में ढली हूँ मैं
बेटी बनके नाज़ो से
phoolo jaise पली हूँ मैं
बहन बनके खिली भी मैं
गृहलक्ष्मी sa bhi saji
माँ का saubhagya se
mamta ka गौरव mein dhali
घर परिवार के रिश्ते नाते निभाते huye
अपने वजूद bhula chuki
हर स्तर पर खड़ी utri
Par ....Apne hone ka ehsaas
kab ka chod chuki
गुमनामी के ज़िन्दगी जीते jeete
अपनी आवाज़ खो चुकी
हाँ, संकोच रखती हूँ मैं
Apne armaano se sharmaana
मर्यादा के नाम पे
त्याग की मूरत banna
Mujhe manzoor na tha
Apne hak ki balidaan dena
Apne adhikaro ke hit mein
Mujhe bhi apni aawaz buland karna
पंख लगाके मुझे भी है उड़ना
अंतहीन हैं मेरी राहें
सीमाओं के पार हैं
निरंतर चलने वाली
अविरामी बहने वाली धार hu mein
युग युग से संस्कारी है नारी
परम्पराओं के अनुयायी
आदि युग से नारी की महिमा
सुन के मैं बलिहारी
ज्ञान की देवी सरस्वती
माँ गंगा पावन इतनी
दिव्य शक्ति प्रतापी है नारी
असुरों के सँघारी
वीराँगना शौर्य है जितना
माता जगतोद्धारि
नाज़ है मुझको नारीत्व pe
अपने अस्तित्व pehchaani
Humhe नाज़ूक न समझना
शक्ति के स्वरुप hai hum
ईश्वर की अपरम्पार महिमा
रचनात्मक रूप hain hum
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