Showing posts with label Spiritual Inspirational. Show all posts
Showing posts with label Spiritual Inspirational. Show all posts

Sunday, May 25, 2025

ख्वाशियों के दौर

 ऊँची अभिलाषाओं के दम पे 

जब भी लम्बी उड़ान भड़ती हूँ 

बड़ी बारीकी से,

 खुद को जान पाती हूँ | 


हज़ारों  ख्वाईशें, हज़ारों उम्मीदेँ लेकर 

अपने जीवन को संजोती हूँ 

मानो कल की ही बात है 

परियों  के देश में

अब भी सपने बुनती हूँ 

 

संतोष तो है, पर अंत नहीं ख्वाईशों का  

एक पूरी होने से पहले दूसरी की मांग शुरू हो जाती हैं 

मानो अंतहीन रेल के पटरी जैसे 

यह सिलसिला जारी है | 


इस ख्वाशियों के दौर में 

खुद को गुमसुम, कमसिन  पाती हूँ 

एक नए सिरे से

जब  अपनी इच्छाओं को टटोलती हूँ 

तो अपने वजूद से जुदा होकर

खुद में सीमित रह जाती हूँ  | 


चाहे कितनी बातें करलो, 

मनको सेहलाके चुप्पी भरलो 

दिल तो नासमझ है, दिल का करार भर लो 


 मन की सुनना जायज़ है  कुछ हद तक 

आखिर ईमान की कदर करना 

अपनी सीमाओं के भीतर

 शालीनता को करार रखना 

अपने मौलिकता के देहलीज़ को 

भूल  के भी न पार करना 

जिंदगी को खुल के जीना 

हर पल में रहके जीवन संजोना 

न कल की फ़िक्र, न कोई भ्रम

मौत आए तो भी क्या गम 

यह चोला तो उतर ही जाना है 

अपने अंतरात्मा से परिचय जो  हुआ 

अब काहे का डर  


अपनी अंतिम यात्रा तक 

ब्रह्माण्ड में घुल जाने तक  

मुझमे मैं  छूट जाने तक

आओ,  हम तुम यह दूरी  तय करले 

अनंत की और रुख बदल ले !

 


 

 







Sunday, March 13, 2022

জানি তুমি ফিরাবে না মোরে

কারণে অকারণে 

প্রভু যদি কভু  করি ভুল 

জানি তুমি ফিরাবে না মোরে 

ক্ষমা প্রার্থী হই  একূল অকূল 

 

ক্ষনে ক্ষনে বিচলিত হয় 

এ আমার অধীর  মন 

সংসারের ভবসাগরে 

ডুবে যায় কত স্বপন

 

তোমার জ্যোতির আলো খানি 

ঘুচিয়ে দিক  সব অন্ধকার 

শুনলে পরে তোমার বাণী 

মনকে করে উজ্জ্বল 

 

 প্রকাশ হয়ে তুমি থেকো

আমার অন্তঃপুরে 

তোমাতে আমি  মিলিয়ে যাই 

ক্ষুদ্র নদী যেমন মহাসাগরে 


না জানি কত মানিক রত্ন 

ঢাকা পড়ে গেছিলো অবিদ্যার অযত্ন 

তোমার করুণা কৃপা সিন্ধুর ধারা 

ঝরিছে অবিরাম ধুয়ে দিলো সব মায়া 

মুছে দিলো সব দ্বেষ বিদ্বেষ 

কাটিয়ে দিলো জর্জরিত কায়া

 

আহা কি আনন্দ আজি

তোমাতে নিজেকে খুঁজি 

জেনেছি এবার আসল স্বরূপ 

 তোমার পাদপদ্মে স্মরণাগত  হয়ে

খুঁজে পেয়েছি এবার   মন্ত্র মূল।